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Poems

 दिल के किसी कोने में ये आरज़ू करते हैं

 

दिल के किसी कोने में ये आरज़ू करते हैं

माँ अब हम और बड़े होने से डरते हैं,

केसे कहें तुझसे कि,

जब छोटे थे तब बड़े होने की राह थी

अपने फ़ैसले खुद लेने की चाह थी,

आज तक जातें हैं

फ़ैसले लेते लेते

कोई चूक हो जाए

तो जवाब देते देते,

उस समय इन बातों से परे थे

बात छोटी हो या बड़ी

हमारे लिए तुम हर पल खड़े थे,

आज महसूस करते हैं

की तभ बेपरवाह हर पल को जीते थे

आज हर पल की परवाह कर जीते हैं...