Phone: +91-9811-241-772

Poems

 एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

 

एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

उन चेहरो के साथ

जिनकी हसीं पीछे छिपे होते है गहरे राज़

या यूँ कह लो

कि ज़िंदगी की अस्ल गहराई का अनुभव मिलता है

जो किताबो से मैं पा नही सकता

क्युकि उनकी हसी के पीछे छुपे गम को

जब भी पढ़ने की कोशिश करता हूँ

तूफ़ानों में नाव चलाने के हुनर में और भी गहरा उतरता हूँ.