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Poems

 एक महान शक्सिहत को शत शत प्रणाम

 

एक महान शक्सिहत को शत शत प्रणाम
जो छोड़ गए हमारे लिए अनगिनत पैगाम,
क्या क्या दोहराए,क्या क्या बतलाए,
दो पंक्तियाँ समर्पित करते हैं उनकी याद मे....
कि हम बहोत खूबसूरत तो नही
पर किसी के दो पल को खूबसूरत बनाने का
जसबा रखते हैं,
उचाईओं को छूने की उम्मीद नही
वहाँ पहुँच कर हिन्दुस्तान का झंडा लहराने को मज़हब समझते हैं
जै हिंद
जै भारत
जै जवान
जै श्री अब्दुल कलाम...........