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Poems

 तुम्हारी खामोशी को नज़र अंदाज़ कर

 

तुम्हारी खामोशी को नज़र अंदाज़ कर

सच हमसे गुनाह हो गया

महोब्बत में एक आशिक हमसे फनाह हो गया,

तुमने सोचा की हम क्यों इज़हार करें

हमने सोचा की वो हमसे पहले पियार करें,

शायद इस ही क्श्मकश में दिल की बात ज़ुँबा पर ना आई

आज समझ पता हूँ जिसकी की गहराई,

पर अब पछताने से

इन बातों को बतलाने से,

बदलाव नही ला सकते हम

काश उस वक़्त ये हिम्मत जुटाई होती

तुमसे ये बात ना छुपाई होती,

तो आज जिस राह पर चल पड़े हैं

वहाँ तुम्हारा एहसास नही

तुम्हारा साथ होता,

खुद से शिकायत नही

खुद पर विश्वास होता..........