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Poems

 यूँ सोचते है कि इस तरह थम जाने में भी कोई समझदारी होगी

 

यूँ सोचते है कि

इस तरह थम जाने में भी कोई समझदारी होगी

मंज़िल तो फिर एक दिन हमारी होगी

थोडा आराम फ़ार्मा लेते हैं

कुछ पल खुद के साथ बिता लेते हैं

क्या जाने गाड़ी फिर कब चल परे

हम खुद से भी..............

मंज़िल पर मिलें......