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Poems

 कहाँ कहाँ घूम रहा हूँ

 

कहाँ कहाँ घूम रहा हूँ
दर बदर तुझे ढूड़ रहा हूँ
हर एक तिनके से ......भी तेरी खबर माँग
गवाह है सूरज ...और चाँद,
खामोशियाँ तोड़ दे
गुज़ारिश है तुझसे
इस रास्ते को छोड़ दे.........
लौट आ मैं तेरे इंतज़ार मैं बैठा हूँ
जैसा भी हूँ ....मुझे पता है
तेरे दिल में मैं ही रहता हूँ