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Poems

 भीगी भीगी तेरी पलके जब मेरे आँचल मे छलके

 

भीगी भीगी तेरी पलके
जब मेरे आँचल मे छलके ,
मुझे डुबो देती है .........आख़िर
तू कह क्यू नही देती है
इस तरह कब तक तड़पाएगी
अपने मन की पीड़ा कब बताएगी ,
वेसे मे जानती हूँ सब
पर तेरे होठों से सुनना चाहती हूँ ,
तुझे खाली कर देना चाहती हूँ
तेरी पलके फिर कभी ना भीगे
तेरी रूह को फिर ज़िंदा कर देना चाहती हूँ...............