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Poems

 ज़िंदगी एक इतेफ़ाक है यूँ कह लो एक मज़ाक है

 

ज़िंदगी एक इतेफ़ाक है
यूँ कह लो एक मज़ाक है,
कभी वफा देता है
कभी बेवफा देता है,
तो कभी जगा देता है 
कभी सुला देता है,
क्यूँ हम इसके हाथो कट्पुतली बन नाचते हैं
आख़िर हम सब कुछ इससे ही क्यूँ चाहते है,