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Poems

 वो पल मैं भूल नहीं पाता हूँ

 

वो पल मैं भूल नहीं पाता हूँ

जब ये कदम ज़मीं पर रखता था,

मुश्किलों से गुज़रता , पर फिर भी पार हो निकलता था,

दिखते कदम हमारे थे

पर क्या पाता था हमें

गोद में हम तुम्हारे थे,

ऐसी है मेरे गुरु की प्रेम की डोरी

जो हर पल मुझे सरहाती है प्रेम से चोरी चोरी,

जिनके लिए कोई छोटा बड़ा या जात पात नही

बस अपने भक्त की खुशहाली मैं ही लीन रहते हैं हर पल

जिसमे होती गुरु के लिए कभी रात नही...