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Poems

 कब्र ताक में बैठी थी हमसे मिलने की आरज़ू लिए

 

कब्र ताक में बैठी थी

हमसे मिलने की आरज़ू लिए

और हम चलते जा रहे थे

हज़ारो सपनो के ले कर दिए,

हारी वो जीते हम

क्योकि दुआओं मे अपनो की

उसे रोकने का है दम...............