Phone: +91-9811-241-772

Poems

 उसकी शक्सियत का लिबास फीका था पर वो मेरे लिए ही जीता था

 

उसकी शक्सियत का लिबास फीका था

पर वो मेरे लिए ही जीता था

मैं ही समझ ना पाया नादान

कैसे छू लेता था आसमान ,

आज टूटा तो इल्म हुआ

कि वो दुआएँ सिलता

और मुझे मुकाम मिलता.............

अदभुद था ये एक तरफ़ा प्रेम का बंधन

मैं कर्ज़दार उसका तब समझा

जब छूट गया तन...........