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Poems

 माँ आँसुओं की आवाज़ सुन लेती थी

 

माँ

आँसुओं की आवाज़ सुन लेती थी

माँ

चीखती आवाज़ की वजह बुन लेती थी

माँ

मुझे सितारे गिन कर दिखा देती थी

माँ

हर सपने को सुनेहरा बना देती थी

माँ

थी तो आँगन में कढ़ी चावल बना मिलता था

आज बिन माँ के आँगन पहुँची हूँ तो

बाबुल बैठा अपना दर्द सिलता था ...............