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Poems

 माना मैं कबीरा नही माना मैं कोई हीरा नही

 

माना मैं कबीरा नही

माना मैं कोई हीरा नही ,

पर मुझमे भी तू ही है

तुझमे भी मैं हूँ

अंतर कर्मों का सही ...............

एक दिन तो एक होंगे

यक़ीनन

उस दिन के इंतेज़ार में चल पड़ा हूँ

मुसाफिर ही सही................