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Poems

 मन के धागे तोड़ मत

 

मन के धागे तोड़ मत

अनकही बातों के लपेटे में आकर छोड़ मत

जो कहना है कह दे

जो पूछना है पूछ ले,

यूँ खामोशी की चादर ओड मत ,

रिश्ते गवाना आसान है

कमाना है मुश्किल

तू डाँट ले

मार ले

पर रास्तों को मोड़ मत ...........