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Poems

 ना जाने क्यों संतोष नही मिल पा रहा था

 

ना जाने क्यों

संतोष नही मिल पा रहा था

जबकि मैं अपने सिवा दिल सबका जीत पा रहा था........

वजह देर से सही

पर अब समझ आई.......

 कि जिनको मैं अपने दिल में बिठा रहा था

मैं खुद भी उनके दिल में बैठना चाह रहा था..................