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Poems

 बाज़ार सज़ा है पर एक बार दिल से सोच

 

बाज़ार सज़ा है

पर एक बार दिल से सोच

आख़िर किसमे रज़ा है,

 सुकून के पल

या बनावटी छल,

 क्या खरीदने निकले

जो पास नही

जिसकी ज़रूरत है

वो तो बिकता भी नही.........

 करले विचार

हर रोज़ है त्योहार,

 दिल से मुस्कुराह

जीले हर ज़रराह,

 दीपावली की हार्दिक शुभ कामनाएँ

आओ प्रेम के दीप जलाएँ