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Poems

 आओ कुछ यादें ढूँढे पुरानी वो माँ के सुनहरे रंग की सारी

 

आओ कुछ यादें ढूँढे पुरानी

वो माँ के सुनहरे रंग की सारी

वो दादी की मुस्कुराहट नूरानी,

 वो पापा का लाड़

वो दादाजी की किससे

उन्ही की ज़ुबानी,

 वो थाल भर खाई मिठाई

वो प्रेम से भरी दीपावली सबके साथ मनाई........

आओ फिरसे प्रेम संग से दीपावली मानते हैं

थोड़ा अपनो के साथ

थोड़ा अपने साथ काम करने वालों के साथ

मिलकर एकता के दीप जलते हैं.........

धनतेरा एवम् दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ

सोनालि निर्मित