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Poems

 हर साल उस रावन को क्या मारते हो जो मर कर आज भी ज़िंदा है

 

हर साल उस रावन को क्या मारते हो

जो मर कर आज भी ज़िंदा है

जिसने माँ सीता का हरण भले ही किया

परंतु उनकी इच्छा की विरुध उन्हें

कभी हाथ नही लगाया

परिणाम! पाप का अंत

तो हम आज भी बार बार उस ही रावन को क्यों मारे

यदि मारना ही है , तो आज के उस रावन को मारो

जो सीता हरण तो करता ही है

और उसे दरिंदे की तरह नोच नोच कर मार  डालता है

या अधमरी हालत में ज़िंदा मरने के लिए छोड़

खुद वो जानवर दूसरे शिकार की तलाश में आज़ाद घूमता है.........

विजयदशमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ