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Poems

 एक समारोह के समान बन गई है ज़िंदगी लोग आते हैं

 

एक समारोह के समान बन गई है ज़िंदगी

लोग आते हैं

मज़े उठाते हैं

और चले जाते हैं

नज़ाने हम कुछ कह कर क्यों नही पाते हैं .............