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Poems

 युहीन नही होंठों पर तेरा नाम लेने से तर जाता हूँ

 

युहीन नही होंठों पर

तेरा नाम लेने से तर जाता हूँ ,

तुझे अपनी ज़िंदगी का बादशाह कहता

तेरी आँखों मे खुद की तस्वीर देख

निखार पाता हूँ,

खुदा को नही देखा

पर तुझसे ज़्यादा क्या चाहेगा मुझे

कह पाता हूँ,

मैं फिसलूं या उड़ूँ

दोनो की मंज़िल में

तेरा साथ ही पाता हूँ ...........