Phone: +91-9811-241-772

Poems

 सुख की चाह थी सुकून की राह थी

 

सुख की चाह थी

सुकून की राह थी

पर दोनो ही रास नही आए

जानते हो क्यों

क्योकि मैने कदम उनके विपरीत चलाए