Phone: +91-9811-241-772

Poems

 इंसानियत का आकाल इस तरह बढ़ता जा रहा है

 

इंसानियत का आकाल

इस तरह बढ़ता जा रहा है ,

कि कोई विरला इसके साथ जीना चाहे भी तो

वो एकेला पड़ता जा रहा है ,

पैदा ये होता नही

बाज़ार मे बिकती नही ,

सस्ती हो गई है इज़्ज़त बहुत

इसलिए ज़िंदगी की असली एह्मियद किसी को  दिखती नही