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Poems

 बस दो पल ही तो माँग रही थी दुख कम करने का सहारा तुझसे बाँध रही थी

 

बस दो पल ही तो माँग रही थी

दुख कम करने का सहारा तुझसे बाँध रही थी

 पर तूने भी नज़र अंदाज़ करके

हमे क्या खूब सिखाया है

सच कहें तो अपंग बनने से बचाया है ,

शुक्र गुज़ार हूँ तेरी

तेरे कारण मेरी शक्ति हुई मेरी

ये तो मेरी परीक्षा थी

तेरे सहारे रहती

तो भिक्षा थी......