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Poems

 तकलीफ़ों का भी क्या मस्त हिसाब है

 

तकलीफ़ों का भी क्या मस्त हिसाब है

 आती हैं

रूलाती हैं

तोड़ जाती हैं

फिर छोड़ भी जाती हैं ,

और फिर

यादों में ठहरा हुआ वक़्त बन कर

तज़ुरबों की कहानियाँ सुनाती है ..................