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Poems

 मंज़िल मिल जाएगी या खुद मंज़िल बन जाओगे

 

मंज़िल मिल जाएगी

या खुद मंज़िल बन जाओगे

भाग्य तुम लिख नही सकते

पर भाग्य तुम खुद बनाओ ,

कदमो पर खुद के तुम यकीन करो

दम है इनमें

तुम कर्म करो ,

मंज़िल मिल जाएगी

या खुद मंज़िल बन जाओगे

क्योकि

तुम उसी खुदा के रूप हो

जिससे आज नही तो कल

तुम खुद मिल जाओगे.