Phone: +91-9811-241-772

Poems

 मुस्कुराते रहने का हुनरहम पर यूँ भारी पड़ा

 

मुस्कुराते रहने का हुनरहम पर यूँ भारी पड़ा

कि जब गम बताना चाहातो लोगो ने मज़ाक में दिया उड़ा

हमारी आँखों का समुंदर बह नही पाया

मन उस तूफान को से नही पाया ,

तब सेमुस्कुराते रहने की अदा सेयूँ नफ़रत सी हो गई ,

खूबसूरत लगती थी जो ज़िंदगीउस पल सेपत्थर सी हो गई ......