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Poems

 कहते हैं कश्ती डूबी वहाँ

 

कहते हैं

कश्ती डूबी वहाँ

जहाँ पानी कम था

हम कहते हैं ..............

आँसू भी कहाँ निकले थे उन आँखों से

जहाँ समुंदर बंद था.......



आगलगी थी

आग भीलगी थी वहाँ

जहाँ पर धुआँ कम था

महोबबत पनप रही थी उस दिल में

जहाँ धड़कनो से जंग था

उम्र निकल गई तो समझा

ये शरीर ही मेरा मेरे संग था