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Poems

 वो नज़ारे हवाओं के थे

 

वो नज़ारे हवाओं के थे

जिनके रुख़ के चलते खुद ब खुद

नज़मों में अल्फ़ाज़ सिले जा रहे थे,

और उन छुपी नज़मों में असर आपकी महोब्बत का था

जो उन हवाओं की और हमको लिए जा रहें थे .....