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Poems

 रिश्तों को किसी की नज़र लगी है

 

रिश्तों को किसी की नज़र लगी है

इस बेबुनियादी सोच पर यकीं कर हमारी सोच पर बरफ जमी है

पिगल कर बह जाए

तो हमें हमारी खामियाँ नज़र आ जाए

और जो बैर का बीज जन्म ले रहा है

शायद वो जन्म ना ले पाए ................