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Poems

 लम्हें कहते हैं

 

लम्हेंकहतेहैं
थमजाऐवक्त
के जीअभीभरानहीं
सूईकीनोकपरठिकारहताहै
क्यातूकभीथकतानहीं
निरन्तरचलताजाताहै
नाकुछ पीतानाकुछ खाताहै,
औरनिर्दईबनकर फिर
हमारेलम्होंकोसताताहै
क्योंहमेंसंगअपनेबँधे  रखताहै
लम्हेंखुशीवेकेहोयागम के
मनभरेयानाभरे
सूईकीनोकपरटांगेरखताहै।