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Poems

 दीप दीपावली के हम जलाएँ

 

दीप दीपावली के हम जलाएँ

वहाँ सरहदों पर जवान वतन पर कुर्बान हो जाएँ

यहाँ आँखों मे हम त्योहार की रौनक सजाएँ

वहाँ वीरों के परिवार वालों की आँखें भर आएँ ,

यहाँ भाईयों की मनपसंद , हम मिठाइयाँ बनवाएँ

वहाँ वीरों की बहने उन मिठाइयों को देख देख रोती जाएँ ,

कैसा अजब सा नज़ारा है ना......

देश में देशवासी त्योहार मनाएँ

हमारी खुशाली के लिए वीर अमर हो जाएँ ,

क्या हमारा फ़र्ज़ नही

कि हम उनके लिए कुछ कर पाएँ

मानते हैं कि उनका दुखतोहम कम नही कर सकते


तो चलो कम से कम उनका दुख ही बाट आएँ ...