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Poems

 हसीन लगती थी मैं सबको जब तक कसिन थी जब से नज़ाकत छोड़ी है

 

हसीन लगती थी मैं सबको जब तक कसिन थी जब से नज़ाकत छोड़ी है

लोगो के नज़रिए ने नज़रे मोडी हैं

कुछ ना करती थी तो ठीक था

अब कुछ भी करलूँ तो

सबको लगता है थोड़ी है

ये कैसी लोगो ने दिखावे की चादर ऑडी है

बुद्यू इंसान भाता है

जिसको देख कर भी नज़र नही आता है

जिस दिन वो बोलने लगता है

वही इंसान बिकार नज़र आता है ..............