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Poems

 खुद पर ना कर इतना गुमान

 

खुद पर ना कर इतना गुमान
कि खुदा की रहमतो को भाँप ना सके,
मौत सबको मिटी मे हे मिलती है
क्या सोचता है तू खुले आकाश के तले,
यदि फर्क सिर्फ़ अमीरी ग़रीबी का है
तो ये बस पैसे का कमाल है,
खुदा ने तो हम सबको एक जैसा हे बनाया है
उपर मिलकर पूछूँगा तुझसे बोल.......
अब तेरा क्या ख़याल है..........