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Poems

 बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है

 

बादलों की गड़गड़ाहट कह रही है

अब वो सुकून नही

बरसा करते थे हम अपनी धुन में

अब वो जुनून नही ,

क्योंकि हमारी बूँदों की टिप टिप अब धरती वासियों जागती नही

पुकारा करती थी हमें जो आवाज़ वो अब

हम तक आती नही ,

संसारिक सुख की चाह में मनुष्य हुमको भूल गया

इसलिए सावन का झूला सूखा ही झूल गया