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Poems

 एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

 

एक अजीब सा रिश्ता बनता जा रहा है

उन चेहरों के साथ ,

जिनके पीछे छिपे होते हैं गहरे राज़ ,

या यूँ कह लो की ज़िंदगी की गहराई का अनुभव मिलता है ,

जो किताबों के ज़रिए मुझे  मिलता नही

क्योंकि उनकी हसी के पीछे गम को

जब भी पढ़ने की कोशिश करता हूँ ,

तूफ़ानो में नाव चलाने के हुन्नर में

और भी गहरा उतरता हूँ