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Poems

 वक़्त के साथ खेलने की कोशिश मे जब नाकाम हुए, तभ समझ आया

 

वक़्त के साथ खेलने की कोशिश मे जब नाकाम हुए,
तभ समझ आया
कितना भी पैसा हो.....पर वक़्त के लिया हम सब की तरह आम हुए,
बावजूद इसके भी घमंड का साथ ना छूटा
ठोकर खा कर ही समझा जब बदनाम सारे आम हुए,
कि क्या लेकर आए थे क्या साथ लेजाना है,
देना लेना ---- दौलत शोहर..सब यहीं रह जाना है,
जो भीतर है हमारे बस वो ही साथ जाना है,
पर उसकी भी बनाई भगवान ने एक परिभाषा है,
जिसमे उन्होने केवल व्यवहार को ही तराशा है...............