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Poems

 वक़्त कम्बक़्त क्या क्या दिखता है

 

वक़्त कम्बक़्त
क्या क्या दिखता है,
जो सागर को मिंटो मे पार कर लेता था
आज वो किनारे पर बैठ सागर मे बूँद बढ़ता है......