Phone: +91-9811-241-772

Poems

 क्यों हर पल हमें अपने आप से लड़ना पड़ता है

 

क्यों हर पल हमें

अपने आप से लड़ना पड़ता है

जिसे मन ना स्वीकारे

मजबूरन उसके साथ भी आगे

बढ़ना पड़ता है

समाज की दलीलों को

खुद की किताब में घड़ना पड़ता है,

मुस्कुराते हुए, संग खुद के

झगड़ना पड़ता है................

स्‍वम् विवेक के धागों को उधड़ना पड़ता है

मन के बलात्कार को स्वीकार कर

बेबसी की अग्नि में जलना पड़ता है .....