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Poems

 एक ज़माना था जब इच्छा कर पर भटक मत

 

एक ज़माना था जब

इच्छा कर पर भटक मत 

जो मिल जाए वो राह पकड़ अटक मत,


मैं तो तेरे ही भीतर रहती हूँ


बस तू देख नही पाता


जिनमें मुझे ढूंढता है 


उनसे वास्तव में तेरा नही है कोई नाता 


सोनाली सिंघल