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Poems

 वो कहते है हमसे

 

वो कहते है हमसे

तुमने जो भी किया

ग़लत ही किया ,

हमने उनकी और नज़रे घुमाई

तो बोलें

खबरदार जो तुमने जवाब कोई भी दिया

वो फ़ैसला सुनते गए

हमारे सवालों को बढ़ाते गए,

इस तरह हमें खामोश कर

वो नादान आनंद लेते हैं

 पर शायद उन्हें इल्म नही

कि इस तरह वे हमारे भीतर जलते आंदोलन को पनाह देते गए ...............

घर लौटने का वक़्त नही

इसलिए अब मकान में रहता है

साथ चलने का वक़्त नही

इसलिए आज इंसान एकेला रहता है...................