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Poems

 पिता वो सवेरा है

 

पिता वो सवेरा है

जिनके साथ सब कुछ मेरा है 

पिता वो शाम है

जहाँ सब कुछ मेरे नाम है

पिता है वो  सीख 

जिसे अपना लें तो ना माँगनी पड़े कभी भीक ,

पिता वो सम्मान है

जिससे चलता हमारा नाम है,

पिता वो सागर है

जो खुद पियासा रह कर

माँ की गोद में सिर रख आज सोने का है मन............