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Poems

 जि़न्दगी के कुछ पलों को फिर ढूँढने निकला था मैं

 

जि़न्दगी के कुछ पलों को फिर ढूँढने
निकला था मैं
हर मोड़ पर कुछ कदम फिसला था मैं
ना जाने क्या कुरेदना चाहता था ओर क्यों
अपनी गलतियों को समझने के बाद भी
किसको भेदना चाहता था मैं
आखिर क्या साबित कर सकता हूँ मैं
गलत था गलत हूँ मैं.............................