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Poems

 ज़माने के हिसाब से चलते रहें ये सोच कर

 

ज़माने के हिसाब से चलते रहें

ये सोच कर

कि एक ना एक दिन हम ज़माने को जीत लेंगें,

 ज़माना हमसे भी होशियार निकला

हम उनके साथ कदमों को मिलाने के लिए जतन करते रहे...........

और ज़माना हमारे ही कंधों का सहारा ले आगे निकला...................