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Poems

 जिसे मैं ढूँढती रही

 

जिसे मैं ढूँढती रही

दर बदर

वो मुझे मिला

मेरे ही घर,

 परख में फरख का फासला

जिस दिन ख़त्म किया,

जो मिला है ..........

 उसे अपना कर

जीना शुरू किया..........