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Poems

 मन क्यूँ रुआंसा है

 

मन क्यूँ रुआंसा है

हर ओर लगता धुआंसा है

फूल खिल रहें हैं

पर मेरा दम घुट रहा है

हर ओर उजाला है

पर मेरे मन का दीपक बुझ रहा हैं

चिड़िया चहक ती है तो लगता है

मुझ पर हस्ती है

मेरे मन सुकून जाने क्या

मुझसे कह रहा है........

खुद को ही आज पढ़ नही पा रही हूँ

जिस रह पर नही चलना चाहती

उस पर चलती जा रही हूँ..............