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Poems

 खुशी ने गम से कहा तू पैदा ही क्यों होता है

 

खुशी ने गम से कहा

तू पैदा ही क्यों होता है

जबकि तेरे साथ होने से

इंसान केवल रोता है,

गम बोला

मैं तो वास्तविकता हूँ

तू भ्रम है,

तेरी कद्र भी वहीं है

जहाँ गम है,

माना तेरे सहारे वो गुनगुनाते हैं

और मुझमे डूब जाते हैं

पर क्या करूँ

इस ही को कर्मों का खेल बताते हैं

मुझे भी कोई शौक नही

आँसू बन बहने का

मुझे भी होटो की लाली अच्छी लगती है

पर ये तो इंसान को ही सोचना है

गम या खुशी किसको चुनना है

क्योंकि इन दोनो की डोर

कर्मों की डाली पर ही लटकी रहती हैं............