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Poems

 रुक जाए जो वो सैलाब नही घर बैठे जो सपने देखें

 

रुक जाए जो

वो सैलाब नही

घर बैठे जो सपने देखें

वो खुवाब नही,

जो मंज़िलों को हासिल करले

उसका........... जवाब नहीं

गर कर्मों में दम हों

तू खुदा की रहमतो का हिसाब नही,

ज़िंदगी एक सच है

कोई किताब नही

दिल से जो इसको जी ले

उसका तो कोई जवाब नही...............