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Poems

 आँसुओं को आज भीगने का मन है

 

आँसुओं को आज भीगने का मन है

बारिश की बूँदों के साथ खिलने का मान है

रूह कह रही है

आज मुझे भी एकेला छोड़ दो

समुंदर की लहरो के साथ मेरा भी अकेले बाते करने का मन है

कदमों की थिरकन भड़ रही है

जाना कहीं चाहती हूँ