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Poems

 वक़्त से नाराज़ हो चला हवाओं से कहा तुमने मुझे छला

 

वक़्त से नाराज़ हो चला

हवाओं से कहा तुमने मुझे छला,

बहक गया था मैं

खुद की लगाई हुई आग में जल रहा था मैं,

उससे लड़ने बैठा था

जिसकी गोद में

मैं खुद रहता था,

जानते हो कब समझ आया

तभ............जब जिनको अपना समझा उन्होने मुझे ठुकराया

और जिस वक़्त से मैं लड़ता था

उस ही ने मुझे गले लगाया .............