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Poems

 अनजाने कभी कभी कुछ इस तरह टकराते हैं

 

अनजाने कभी कभी

कुछ इस तरह टकराते हैं

मुलाक़ातें कभी हुई नहीं

शामें साथ गुज़री हों

यूँ जसबात टकराते हैं